CLOSE TO ME

My friends,
It feels good to have my own blog.....there are things which are close to my heart and things which have affected me one way or the other.....my thoughts,my desires,my aspirations,my fears my gods and my demons---you will find all of them here....I invite you to go through them and get a glimpse of my innermost feelings....................

Tuesday, May 26, 2020

लाल भूगर्भ


हवा ठंडी से सर्द से बर्फीली हो
कंटीली होती चली गयी
तुम्हारी आवाज़ मेरे कानों में गूँजती कह रही थी
कोई ख़तरा नहीं है
विश्वास करो, पूर्ण विश्वास
मैं लगभग आश्वस्त हो गयी थी
अपने स्वाभिमान को ताक पर रखने के लिए
लगभग आश्वस्त
अपने विवेक को अलग रखने को
लेकिन एक बार फिर से वही भावना घेर रही है
फिर से वही दुःखद दुःस्वप्न
कि कुछ गलत है
स्वागत है लाल भूगर्भ में
सही नहीं लग रहा है
पूरी ताकत से हूँ बचाने की कोशिश में
छोड़ना चाहती हूँ सारा नियंत्रण
तुम अभिनय कर सकते हो
कि तुम्हारा हृदय सोने का है
पर तुम्हें पता है तुमने क्या किया है
तुम कितने भी ग़ुलाब तोड़ कर लाओ
पर तुम्हें पता है तुमने क्या किया है 
(February 7, 2019 at 1.20 A. M.)

तुम से जो हो कर आ रही हैं
हवाओं में अजब सी खुशबू है

February 12, 2020 at 1.41 P. M.

एक मोड़, दूसरा, फिर तीसरा
जिंदगी इन्हीं अनन्त मोड़ो में उलझती
न जाने कब अन्तिम पड़ाव की ओर चल पड़ी।
February 13, 2019

That's what TIME is all about--it continues to move and with it we too move--we grow,we learn,we become maturer--and when there is a loved one to share that time with,it becomes more poignant....
March 23, 2010

For a WOMAN of SUBSTANCE--"If she's amazing, she won't be easy. If she's easy, she won't be amazing. If she's worth it, you won't give up. If you give up, you aren't worth it".

भावुक मृत्यु


औरत की दुर्दशा का निर्णायक कारण,
छोड़ दिया जाता है उन मर्दों पर,
जिन्हें न औरत के मन का पता है,
और न ही उनकी आत्मा का।
वो नियंत्रण में रखता है,
वो नियंत्रित रहती है।
वो हमारे शरीरों पर काबू पाते हैं।
हमारे भाग्य का फैसला करते हैं।
घृणा से ग्रसित,
वो हमारे दिमाग को भी काबू में रखते हैं।
औरतों के लिए उनकी नफ़रत,
हमारे हकों की मांग के लिए उनका द्वेष।
वो नियंत्रित रखना चाहते हैं।
वो वश में रखना चाहते हैं।
इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता,
और प्रायः इसे ख़ारिज कर दिया जाता है।
इस लिए यह हम पर निर्भर है,
कि हम बताएँ कि ऐसा होता है।
बहुत देर तक हमने इसे अनदेखा किया है।
अपने अंदर दबा कर रखा है।
परन्तु जो क्षति इस से होती है,
उसे छिपाना आसान नहीं होता।
औरतें इस से हर दिन समझौता करती हैं।
इस से मिला दर्द जाता नहीं।
हर साँस के साथ यह और बढ़ता जाता है,
ताक़तवर होता है।
इसका अंत है,
भावुक मृत्यु।
हम इसके साथ जीना सीख लेते हैं।
हम ढोंग करना चुन लेते हैं।
अपने अज्ञान में हम आशा करते हैं,
कि पीड़ा ख़त्म हो जाएगी।
यदि हम गुस्से को नकारते हैं,
पीड़ा को अस्वीकार करते हैं,
तो यह घृणा जो हम महसूस करते हैं,
हमें पागलपन कि ओर अग्रसर होने को
बाध्य कर देगी।
फिर एक दिन आएगा कि हम देखेंगे,
कि हम वो नहीं,
जो हम दिखाने का ढोंग करते हैं।
हम निष्क्रिय नहीं रहेंगे,
न ही अपनी पीड़ा को नकारेंगे।
न ही दूसरे के लाभ के लिए
गाली सुनेगें।
गीत गाए जा रहे हैं
और यह एक शुरुआत है।
लेकिन यह सब
हमारे हृदय के विषाद को ख़त्म नहीं कर सकता।
शब्द लिखे जाते हैं,
कवितायेँ लिखी जाती हैं।
हमारे अंदर की पीड़ा,
समय के साथ काम नहीं होती।
औरतें इस से हर दिन समझौता करती हैं।
इस से मिला दर्द जाता नहीं।
हर साँस के साथ यह और बढ़ता जाता है,
ताक़तवर होता है।
इसका अंत है,
भावुक मृत्यु।
आदमी नियम बनाते हैं।
औरतें उनका पालन करती हैं।
हम असहाय महसूस करते हैं।
हम भागते हैं,
हम छिपते हैं।
प्रतिदिन केवल हमारे हक़ ही नहीं चुराए जा रहे।
पर, हर दिन, हम में से
हर एक का,
कुछ न कुछ ग़ुम हो रहा है।
फिर एक दिन आएगा कि हम देखेंगे,
कि हम वो नहीं,
जो हम दिखाने का ढोंग करते हैं।
हम निष्क्रिय नहीं रहेंगे,
न ही अपनी पीड़ा को नकारेंगे।
न ही दूसरे के लाभ के लिए
गाली सुनेगें।
April 16, 2019
tumhaari pehchaan tum khud ho/
khud ko dhoondoge to apni pehchaan bhi mil jaayegi.
तुम्हारी पहचान तुम ख़ुद हो।
ख़ुद को ढूंढोगे तो अपनी पहचान भी मिल जाएगी।।
April 20, 2011