CLOSE TO ME

My friends,
It feels good to have my own blog.....there are things which are close to my heart and things which have affected me one way or the other.....my thoughts,my desires,my aspirations,my fears my gods and my demons---you will find all of them here....I invite you to go through them and get a glimpse of my innermost feelings....................
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Sunday, July 10, 2011

मैं रेत, वो पानी.....

उसके होने से मैं हूँ,
वो नहीं तो अपना वजूद ढूँढता हूँ!
उसके होने से आबाद हूँ,
आज उसके जाने से जर्जर पड़ा हूँ!
तपती रेत से पड़े छालों में इतनी तासीर न थी,
जितने गहरे ज़ख्म उसके जाने ने दिए!
आज जब वो नहीं तो मेरा अस्तित्व नहीं,
बांसुरी बिन कान्हा, कान्हा नहीं!
मैं रेत, वो पानी,
मेरे ऊपर गिरती और विलुप्त हो जाती!
सोचता था ठंडक देगी मुझको,
चली गयी और झुलसा मुझको!
आज वो नहीं,
तो कुछ नहीं!
जानता था रेत और पानी का मिलन न होगा कभी,
पर दिल कहता था थोड़ी देर देख ले अभी!
अब मैं हूँ और मेरी तन्हाई,
और जिसे कभी मेरी याद न आई,
आज उसे याद कर रोता हूँ अकेले में!!!
July 10, 2011 at 12.44 A.M.
PART----II
रेत पर गिर पानी उस में समां जाएगा
उस में विलीन हो, उसका हिस्सा बन जाएगा!
फिर न पानी रहेगा, न रेत,
इक दूसरे का वजूद अपने में समेत,
दोनों हो जायेंगे एक!!!! (8.43 P.M.)
Part III
जब मिल जायेंगे दोनों, रेत और पानी,
लिखेंगे फिर नयी कहानी!
पानी समां रेत में,
समझेगा खुद को गौर्वन्वित,
अपनी हस्ती मिटा,
उसकी हस्ती में मिल,
रहेगा सदा हर्षित!!! (8.52 P.M.)