मैं बंजर धरती,
प्यासी,
किसका पेट भरूँ!
भूखे-प्यासे बच्चे,
किसको शरण दूँ!
आसमान में,
बादल की हलकी सी आहट हुई!
मैं चौंक गयी!
लगा, कि मुझे तृप्त करने आया है!
मगर, वो मुँह फेर,
निकल गया!
सूखी आँखों से,
एक आँसू भी न छलका!
दिल पर जैसे एक वज्र सा गिर पड़ा!
वो चला गया,
मैं प्यासी ही रह गयी!
बेहाल,अतृप्त,अधूरी!!
मेरे बच्चे उम्मीद-भरी नज़रों से
मुझे देखते हैं!
दिल में इक फाँस सी चुभती है!
स्वयं प्यासी,
हाथ उठा ख़ुदा को कहती हूँ,
"तू भी तो पिता है,
जैसे मैं माँ हूँ!
इन बच्चों को अपने आशीर्वाद से
निहाल कर!
इनकी प्यासी आत्मा को
सकूँ बक्श
कि वो तृप्त हो सर उठा कह सकें--
वाह ख़ुदा तेरी कुदरत,
वाह ख़ुदा तेरी खुदाई!!!"(15.05.2010)
CLOSE TO ME
My friends,
It feels good to have my own blog.....there are things which are close to my heart and things which have affected me one way or the other.....my thoughts,my desires,my aspirations,my fears my gods and my demons---you will find all of them here....I invite you to go through them and get a glimpse of my innermost feelings....................
It feels good to have my own blog.....there are things which are close to my heart and things which have affected me one way or the other.....my thoughts,my desires,my aspirations,my fears my gods and my demons---you will find all of them here....I invite you to go through them and get a glimpse of my innermost feelings....................
Saturday, May 15, 2010
Thursday, May 13, 2010
पैगाम
वो चिड़िया तुम्हारे पास कहाँ से आती
वो तो अभी बैठी है मेरे कन्धों पर
जो हवा तुम्हें मेरे होने का पता दे
वो हवा आज कुछ मंद सी है
बादलों कि गरज आई तो थी मेरा पैगाम ले कर
मगर वो भी कहीं खो गयी इस फैले आसमान में
तुम्हारे संग तो मैं सदा से हूँ
फिर क्या करना इन सब से पैगाम ले कर
अपने मन में झाँक कर देखो
मुझे वहीँ पाओगे
जहाँ छोड़ गए थे कुछ समय पहले !!!(13.05.2010)
वो तो अभी बैठी है मेरे कन्धों पर
जो हवा तुम्हें मेरे होने का पता दे
वो हवा आज कुछ मंद सी है
बादलों कि गरज आई तो थी मेरा पैगाम ले कर
मगर वो भी कहीं खो गयी इस फैले आसमान में
तुम्हारे संग तो मैं सदा से हूँ
फिर क्या करना इन सब से पैगाम ले कर
अपने मन में झाँक कर देखो
मुझे वहीँ पाओगे
जहाँ छोड़ गए थे कुछ समय पहले !!!(13.05.2010)
गठ-बंधन
तुझ में मैं समायी हूँ
मुझ में तू है
हम दोनों का गठ-बंधन
दुनिया को उसकी पहचान देता है
तू मेरा पूरक है
और मैं तेरी
तू नहीं तो मैं नहीं
मैं नहीं तो तू नहीं
एक दुसरे के भीतर रह कर ही
हम जिंदा हैं
और पूरण करते हैं
ईशवर के चित्र को!!!(13.05.2010)
मुझ में तू है
हम दोनों का गठ-बंधन
दुनिया को उसकी पहचान देता है
तू मेरा पूरक है
और मैं तेरी
तू नहीं तो मैं नहीं
मैं नहीं तो तू नहीं
एक दुसरे के भीतर रह कर ही
हम जिंदा हैं
और पूरण करते हैं
ईशवर के चित्र को!!!(13.05.2010)
Tuesday, April 13, 2010
Friday, April 9, 2010
इन्टरनेट
तुम दूर हो
बहुत दूर
लगता नहीं तुम मिलोगी कहीं
एक दिन इन्टरनेट के माध्यम से
तुम से मुलाक़ात हो गयी
दिल ने कहा तुम ही हो,तुम वही हो
तुम से मिलने पर मैं खो सा गया
सब कुछ भूल गया
अपने अंतर्मन की सब बातें तुम से कह डालीं
लगा मानो हम में कोई दूरी नहीं है
तुम मेरे करीब हो
इतनी करीब की तुम मुझ में समां गयी
और मैं तुम में
हम दोनों एक हो गए
मैं भूल गया की तुम कोरी कल्पना हो
तुम मेरी तरह नहीं हो सकती
मैं तो तुम्हारा तस्सवुर कर
तुम्हे अपने रूप में ढालने के लिए बेताब फिर रहा हूँ
पर कल्पना तो कल्पना है
उसे कहाँ रूप दे पाउँगा मैं
तुम्हारी काल्पनिक खूबसूरती का पार न पा सकूंगा
मैं तो केवल दूर से देख कर तुम्हे
अपनी संगिनी बनाने का ख़वाब ही देख सकता हूँ
फिर एक दिन तुम चली गयीं
कभी न लौटने के लिए
ख़ाली स्क्रीन मुँह बाए मेरी तरफ देख रही है
मानो मुझे चिढ़ा रही हो
कह रही हो
कि कल्पना कभी वास्तविकता नहीं बन सकती
वो तो केवल कुछ पलों के लिए
मन को बहला देती है
पर मैं खुश हूँ
कि कुछ पल के लिए ही सही
मैंने तुम्हें पाया तो सही
बस मेरा जीवन सफल हो गया
एक बार तुम्हें मिलने के बाद
अब मौत भी आये तो कोई ग़म नहीं
क्योंकि तुम एक हो गयी मुझ में समां कर!!!!!!!!!!!!(09.04.2010)
बहुत दूर
लगता नहीं तुम मिलोगी कहीं
एक दिन इन्टरनेट के माध्यम से
तुम से मुलाक़ात हो गयी
दिल ने कहा तुम ही हो,तुम वही हो
तुम से मिलने पर मैं खो सा गया
सब कुछ भूल गया
अपने अंतर्मन की सब बातें तुम से कह डालीं
लगा मानो हम में कोई दूरी नहीं है
तुम मेरे करीब हो
इतनी करीब की तुम मुझ में समां गयी
और मैं तुम में
हम दोनों एक हो गए
मैं भूल गया की तुम कोरी कल्पना हो
तुम मेरी तरह नहीं हो सकती
मैं तो तुम्हारा तस्सवुर कर
तुम्हे अपने रूप में ढालने के लिए बेताब फिर रहा हूँ
पर कल्पना तो कल्पना है
उसे कहाँ रूप दे पाउँगा मैं
तुम्हारी काल्पनिक खूबसूरती का पार न पा सकूंगा
मैं तो केवल दूर से देख कर तुम्हे
अपनी संगिनी बनाने का ख़वाब ही देख सकता हूँ
फिर एक दिन तुम चली गयीं
कभी न लौटने के लिए
ख़ाली स्क्रीन मुँह बाए मेरी तरफ देख रही है
मानो मुझे चिढ़ा रही हो
कह रही हो
कि कल्पना कभी वास्तविकता नहीं बन सकती
वो तो केवल कुछ पलों के लिए
मन को बहला देती है
पर मैं खुश हूँ
कि कुछ पल के लिए ही सही
मैंने तुम्हें पाया तो सही
बस मेरा जीवन सफल हो गया
एक बार तुम्हें मिलने के बाद
अब मौत भी आये तो कोई ग़म नहीं
क्योंकि तुम एक हो गयी मुझ में समां कर!!!!!!!!!!!!(09.04.2010)
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