CLOSE TO ME

My friends,
It feels good to have my own blog.....there are things which are close to my heart and things which have affected me one way or the other.....my thoughts,my desires,my aspirations,my fears my gods and my demons---you will find all of them here....I invite you to go through them and get a glimpse of my innermost feelings....................

Saturday, September 19, 2020

देश का गौरव

 देश असमंजस में था

ऐसा नेता चाहिए था,

जो हिंदुस्तान को प्रगति की राह पर ले जाता

नज़र दौड़ा रहे थे सब हर ओर

मिल सका कोई ऐसा,

भारत को ले जो जाता शिखर की ओर

ऐसे में आये मोदी

थे ऐसी  ऊँचाई  पर ,

छू सकता था कोई उनकी परछाईं  को

सफ़ेद कुरता  पजामा,

गले में गमछा

सादगी की  मूरत ,

तेजस्वी सूरत

दिखाई अपनी निष्ठा ,

बढ़ाई देश की प्रतिष्ठा

लगन थी अंधेरों से जूझने की, 

देश को दुनिया में प्रकाशमान करने की  

किसानों और ग्रामवासियों को दिया सम्मान,

दिखाया वो हैं कितने महान  

अविरल सी नदी से बहते,

शांत भाव से विचार व्यक्त करते  

बेमिसाल नीतियों से संवारा ,

भारत को कष्टों से उबारा  

छाए हैं विश्व पर मोदी ,

दुश्मनों की कब्र जिन्होनें खोदी

दुनिया गा रही गुणगान,

अप्रतिम नेता हैं मोदी महान  

उपलब्धियां आपकी याद रखेगा संसार ,

शाश्वत प्रेरणा बनेंगी युवाओं के लिए अपार  

सबका है विश्वास मोदी पर,


खड़ा
किया जिन्होनें भारत को दुनिया के मंच पर  

(September 17. 2020 at 3. 15 P. M.)

  


Sunday, June 7, 2020

मूक...




औरत को दबाना,
अपना हक़ समझते होI
हर हाल में दबाते होI
हर तरह से दबाते होI

कभी पैरों तले,
कभी अपनी कड़वी जुबाँ से निकले
शब्दों से,
कभी मानसिक प्रताड़ना दे कर,
कभी उचित अधिकार मार करI
यहाँ तक कि माँ बनने का हक़ भी छीन लेते होI

माँ बनना तो उच्त्तम अधिकार है उसकाI
फिर क्यों ऐसा दुर्व्यवहार करते हो?

माँ बनने के बाद औरत मर्द के संग रहे रहे,
ये भी उसी का निर्णय हैI
तुम क्यों समाज के ठेकेदार बन,
उस पर अपनी हर बात, हर मर्ज़ी,
थोपते हो?

बच्ची जन्मी हैI
मातम मत करोI
खुशियां मनाओI
मैं कर लूंगी उसकी देखभाल,
स्वयंI
तुम्हारी आवश्यकता नहींI
ही तुम्हारे नाम कीI
मेरी बच्ची है,
मेरे नाम से ही बढ़ेगीI

पर तुम कहाँ समझ पाओगे?
तुम्हें कहाँ ये बात हज़म होगी,
कि मैं सक्षम हूँ
उसे पालने, सँभालने
और बढ़ा करने मेंI

तुम नहीं समझ पाए,
आदमी या औरतI
पर एक किन्नर ने समझ लियाI
कहा कि मेरी बिटिया हैI
मेरी ही रहेगीI

हर बार रोड़े अटकाएI
हर बार घृणा भरी नज़रों से देखाI
घृणा से लबालब शब्दों के नश्तर चलाएI

एक लहर आयी है,
मुझे डूबाने के लिएI
एक जवार उठी है,
मुझे बहा ले जाने के लिएI

लगता है टूट गयी हूँ फिर से,
कि कहने को कुछ नहीं बचा हैI
मेरी आवाज़ तुम्हारी घृणा की गड़गड़ाहट में
डूब गई हैI

पर मैं रो नहीं सकतीI
मैं टूट नहीं सकतीI

जब-जब तुम कोशिश करोगे,
मेरी आवाज़ को बंद करने की,
मुझ पर प्रहार करने की,
मैं चुप नहीं रहूँगीI

हालांकि तुम मुझे चुप रखना चाहते होI
और जब भी तुम कोशिश करते हो,
मैं काँप जाती हूँI


पर मुझे पता है कि मैं अनिर्वचनीय नहीं रहूँगीI
पर मुझे पता है कि मैं अनिर्वचनीय नहीं रहूँगीII
(June 7, 2020 at 6.05 P. M.)