My friends,
It feels good to have my own blog.....there are things which are close to my heart and things which have affected me one way or the thoughts,my desires,my aspirations,my fears my gods and my demons---you will find all of them here....I invite you to go through them and get a glimpse of my innermost feelings....................

Thursday, September 15, 2011


हाथ जब तुमने थामा,
कहा कि सात जन्म न छोडूंगा!
मैं तुम्हारा शिव, तुम्हारा राम,
तुम्हारा कृष्ण बन दिखलाऊँगा!
न तुम शिव बन मेरा मान रख पाए,
न मेरे राम बन पाए,
न ही कृष्ण सा प्यार कर पाए मुझसे!
मैंने कब तुमसे शिव माँगा,
कब चाहा कि तुम राम या कृष्ण बनो मेरे!
एक प्रेमी चाहा था,
जो मेरा हाथ थाम
चलता रहे मेरे साथ!
मगर....तुम्हारा साथ,
.....तुम्हारा प्यार
सब मृगतृष्णा निकला!
September 15, 2011 at 10.33 P.M.

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